Wednesday, July 23, 2008
जीवन के पल
क्यूँ हैं हर कोई सहमा हुआ ,
कौन हिं जो उससे बिछुड़ गया ,
कहाँ गयी वोह हँसी जो चेहरे पर आती थी ,
एक नयी ताज़गी जीवन मैं भर जाती थी ,
कहाँ गए वोह सपने जो हम कल के सजाया करते थे,
जिन्हें सोचकर आकाश की सीमओं मैं खो जाए करते थे ,
कहाँ गयी वोह सुबह जो इस अँधेरी रात के बाद एक उम्मीद की किरण लाया करती थी,
निराशा मैं भी आशा का एक गीत नया गाया करती थी ,
कहाँ गए वोहलम्हे जो यादों कोरंगों से भर जाए करते थे ,
और बीत जाने के बाद याद बहुत आया करते थे ,
इस जीवन की भी कहानी अंनंत हैं ,
एक सुन्दर शुरुआत के बाद एक दर्दभरा अंत हैं ..........................
Wednesday, May 7, 2008
अन्तर मन
कभी सागर की गहराइयों मैं उतर जाता हूँ,
कभी आकाश के नीले रंग मैं खो जाता हूँ,
मन मैं बहुत कुच्छ होते हुए भी ,
कुच्छ नहीं कह पाता हूँ,
यह कैसी हैं पहेली ,
मैं इसमें उलझ जाता हूँ,
अंधेरी रात मैं भी एक ,
नयी सुबह का सपना सजाता हूँ,
ऐसा कुछ तो हैं ,
जिसकी तालाश में चला जाता हूँ,
काश वोह मिल जाए ,
जिससे यह चेहरा खिल जाए ,
नहीं तो तनहा रहकर भी ,मैं मुस्कुराता हूँ .
कभी आकाश के नीले रंग मैं खो जाता हूँ,
मन मैं बहुत कुच्छ होते हुए भी ,
कुच्छ नहीं कह पाता हूँ,
यह कैसी हैं पहेली ,
मैं इसमें उलझ जाता हूँ,
अंधेरी रात मैं भी एक ,
नयी सुबह का सपना सजाता हूँ,
ऐसा कुछ तो हैं ,
जिसकी तालाश में चला जाता हूँ,
काश वोह मिल जाए ,
जिससे यह चेहरा खिल जाए ,
नहीं तो तनहा रहकर भी ,मैं मुस्कुराता हूँ .
"संवेदना "
"जो ख्वाब उन नन्ही आँखों ने सजाये थे ,
जो रेत के घर बनाये थे ,
हकीक़त से रूबरू होते ही वोह कहीं खो गए ,
क्या बनने चले थे और क्या से क्या हो गए,
टूट गया कांच सा वोह मन ,
छीन गया उन फूलों से उनका बचपन ,
वोह नन्ही कलियाँ कहीं मुरझा गयी,
ना जाने बेमौसम यह पतझड़ कहाँ से आ गयी,
इन शब्दों मैं छिपी हैं उनके जीवन की वेदना ,
इनके माध्यम से व्यक्त करता हूँ उनके प्रति मैं अपनी संवेदना
जो रेत के घर बनाये थे ,
हकीक़त से रूबरू होते ही वोह कहीं खो गए ,
क्या बनने चले थे और क्या से क्या हो गए,
टूट गया कांच सा वोह मन ,
छीन गया उन फूलों से उनका बचपन ,
वोह नन्ही कलियाँ कहीं मुरझा गयी,
ना जाने बेमौसम यह पतझड़ कहाँ से आ गयी,
इन शब्दों मैं छिपी हैं उनके जीवन की वेदना ,
इनके माध्यम से व्यक्त करता हूँ उनके प्रति मैं अपनी संवेदना
Tuesday, April 29, 2008
किसी की अभिलाषा
नदियाँ के पानी सी होगी वोह,
एक कहानी सी होगी वोह ,
फूलों को भी खिला दे जो,
हर और खुशियाँ फैला दे,
हर पल को महका दे ,
ऐसी होगी वोह,
एक कल्पना वोह,
एक तालाश वोह ,
किसी के लिए प्रेरणा,
किसी के लिए आखरी आस वोह,
ज़िन्दगी को नए आयाम देगी जो ,
एक अनसुनी कहानी सी वोह ,
ऐसी होगी वोह,
हाँ शायद ऐसी ही....
एक कहानी सी होगी वोह ,
फूलों को भी खिला दे जो,
हर और खुशियाँ फैला दे,
हर पल को महका दे ,
ऐसी होगी वोह,
एक कल्पना वोह,
एक तालाश वोह ,
किसी के लिए प्रेरणा,
किसी के लिए आखरी आस वोह,
ज़िन्दगी को नए आयाम देगी जो ,
एक अनसुनी कहानी सी वोह ,
ऐसी होगी वोह,
हाँ शायद ऐसी ही....
सपने
सपने एक नए जहाँ मैं ले जाते है,
सितारों से रूबरू कराते है ,
यह सपने नई मंजिलो की चाह जागते हैं ,
निराशा मैं आशा के पंख लगते है ,
यह अनोखे सपने....
सितारों से रूबरू कराते है ,
यह सपने नई मंजिलो की चाह जागते हैं ,
निराशा मैं आशा के पंख लगते है ,
यह अनोखे सपने....
एक और कारवाहा
उन लम्हों की जीकर हम चले ,
कुछ यादें संजोए हम चले ,
एक मंजिल की तलाश मैं हम चले ,
उड़ने उस आकाश मैं हम चले ,
उन पलों मैं खोये हम चले ,
यादों का एक आशियाँ बनाकर और उसको दिल मैं बसाकर हम चले ,
फिर मिलने की एक आस हैं,
मिलेंगे यह विश्वास हैं ,
पर इस कारवां को फिलहाल यहीं अब छोड़े हम चले.
कुछ यादें संजोए हम चले ,
एक मंजिल की तलाश मैं हम चले ,
उड़ने उस आकाश मैं हम चले ,
उन पलों मैं खोये हम चले ,
यादों का एक आशियाँ बनाकर और उसको दिल मैं बसाकर हम चले ,
फिर मिलने की एक आस हैं,
मिलेंगे यह विश्वास हैं ,
पर इस कारवां को फिलहाल यहीं अब छोड़े हम चले.
कुछ खास लम्हे
यह लम्हे हम कभी ना भूल पायेंगे ,
जो बस कुच्छ पल मैं यादें बन जायेंगे ,
वोह हँसना, वोह गुनगुनाना ,
वोह लड़ना ,फिर मिल जाना,
इन यादों को सोचकर हम मुस्कुराएंगे ,
यह लम्हे हम कभी ना भूल पायेंगे ,
यह लम्हे हमेशा याद आयेंगे ,
हर खुशी हर गम मैं उनका साथ होना ,
नये नये सपने सजाना ,
उनको सोचकर आकाश मैं उड़ जाना,
सबका साथ पाकर उनमे खो जाना .
उस काली रात भी हम साथ थे ,
आशा नहीं थी फिर भी हाथों मैं हाथ थे ,
वोह सब पल अब यादें बन जायेंगे ,
यह लम्हे हम कभी ना भूल पायेंगे ,
यह लम्हे हमेशा याद आयेंगे ...........
जो बस कुच्छ पल मैं यादें बन जायेंगे ,
वोह हँसना, वोह गुनगुनाना ,
वोह लड़ना ,फिर मिल जाना,
इन यादों को सोचकर हम मुस्कुराएंगे ,
यह लम्हे हम कभी ना भूल पायेंगे ,
यह लम्हे हमेशा याद आयेंगे ,
हर खुशी हर गम मैं उनका साथ होना ,
नये नये सपने सजाना ,
उनको सोचकर आकाश मैं उड़ जाना,
सबका साथ पाकर उनमे खो जाना .
उस काली रात भी हम साथ थे ,
आशा नहीं थी फिर भी हाथों मैं हाथ थे ,
वोह सब पल अब यादें बन जायेंगे ,
यह लम्हे हम कभी ना भूल पायेंगे ,
यह लम्हे हमेशा याद आयेंगे ...........
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