Tuesday, April 29, 2008

किसी की अभिलाषा

नदियाँ के पानी सी होगी वोह,
एक कहानी सी होगी वोह ,
फूलों को भी खिला दे जो,
हर और खुशियाँ फैला दे,
हर पल को महका दे ,
ऐसी होगी वोह,
एक कल्पना वोह,
एक तालाश वोह ,
किसी के लिए प्रेरणा,
किसी के लिए आखरी आस वोह,
ज़िन्दगी को नए आयाम देगी जो ,
एक अनसुनी कहानी सी वोह ,
ऐसी होगी वोह,
हाँ शायद ऐसी ही....

सपने

सपने एक नए जहाँ मैं ले जाते है,
सितारों से रूबरू कराते है ,
यह सपने नई मंजिलो की चाह जागते हैं ,
निराशा मैं आशा के पंख लगते है ,
यह अनोखे सपने....

एक और कारवाहा

उन लम्हों की जीकर हम चले ,
कुछ यादें संजोए हम चले ,
एक मंजिल की तलाश मैं हम चले ,
उड़ने उस आकाश मैं हम चले ,
उन पलों मैं खोये हम चले ,
यादों का एक आशियाँ बनाकर और उसको दिल मैं बसाकर हम चले ,
फिर मिलने की एक आस हैं,
मिलेंगे यह विश्वास हैं ,
पर इस कारवां को फिलहाल यहीं अब छोड़े हम चले.

कुछ खास लम्हे

यह लम्हे हम कभी ना भूल पायेंगे ,
जो बस कुच्छ पल मैं यादें बन जायेंगे ,
वोह हँसना, वोह गुनगुनाना ,
वोह लड़ना ,फिर मिल जाना,
इन यादों को सोचकर हम मुस्कुराएंगे ,
यह लम्हे हम कभी ना भूल पायेंगे ,
यह लम्हे हमेशा याद आयेंगे ,
हर खुशी हर गम मैं उनका साथ होना ,
नये नये सपने सजाना ,
उनको सोचकर आकाश मैं उड़ जाना,
सबका साथ पाकर उनमे खो जाना .
उस काली रात भी हम साथ थे ,
आशा नहीं थी फिर भी हाथों मैं हाथ थे ,
वोह सब पल अब यादें बन जायेंगे ,
यह लम्हे हम कभी ना भूल पायेंगे ,
यह लम्हे हमेशा याद आयेंगे ...........