Thursday, March 19, 2009

समय

कल तक जो फिजा का मिजाज़ बताते थे ,
जिनको देखर दरख्त भी हरे हो जाते थे ,
वो आते थे थो पंची भी नए गीत गाते थे ,
अब वोह पंची भी कुच्छ कुच्छ खफा हो गए ,
जाने वोह लोग कहाँ खो गए ,
जो कल तक थे अपने आज अनजाने से हो गए ,
जो उम्मीद की रोशिनी लाये करते थे ,
वोह अब इस अँधेरी रात मैं गुम हो गएजाने वोह लोग कहाँ खो गए......
जो कल तक साया बने रहते थे ,
वोह साए भी सुबह होते ही कुछ धुंधले से हो गए ,
जिन्हें सोचकर चेहरे पर एक मुस्कराहट सी आ जाती थी ,
अब वोहीं नाराजगी का कारण हो गए ,
जो फूल बनकर महकते थे सबको ,
वोह अब एक कांटे की तरह दर्द का सबब हो गए ,
जाने इस भीड़ मैं वोह लोग कहाँ खो गए कल तक अपने से थे ,
अब कुछ बेगाने से हो गए.....

निश्चल

किसी ने पूछा की क्या हैं प्यार ,
मैंने कहा की यह एक इबादत हैं,
आज की इस दुनिया मैं इसको फैलाने की एक अदद जरुरत हैं ,
यह एक एहसास और एक सपना हैं ,
की दुर्र होते हुए भी कोई अपना हैं ,
बिखरे हुए मोतियों को माला मैं पिरोने का एक माध्यम हैं ,
विभिन्न व्यक्तित्वों के एक होने का एक अनूठा संगम हैं ,
प्यार नीले सागर की एक अनंत गहराई हैं,
आकाश की वोह सीमा हैं जहाँ तक मानवीय सोच अब तक नहीं पहुच पायी हैं,
यह किसी के लिए एक आखरी आस हैं,
किसी के लिए मन मैं छिपा एक विश्वास है ,
किसी के लिए यह एक ख़ुशी हैं और किसी के लिए गम हैं ,
परन्तु इस शब्द की परिभाषा के लिए मेरे यह शब्द भी कम हैं.

Wednesday, July 23, 2008

जीवन के पल


क्यूँ हैं हर कोई सहमा हुआ ,
कौन हिं जो उससे बिछुड़ गया ,
कहाँ गयी वोह हँसी जो चेहरे पर आती थी ,
एक नयी ताज़गी जीवन मैं भर जाती थी ,
कहाँ गए वोह सपने जो हम कल के सजाया करते थे,
जिन्हें सोचकर आकाश की सीमओं मैं खो जाए करते थे ,
कहाँ गयी वोह सुबह जो इस अँधेरी रात के बाद एक उम्मीद की किरण लाया करती थी,
निराशा मैं भी आशा का एक गीत नया गाया करती थी ,
कहाँ गए वोहलम्हे जो यादों कोरंगों से भर जाए करते थे ,
और बीत जाने के बाद याद बहुत आया करते थे ,
इस जीवन की भी कहानी अंनंत हैं ,
एक सुन्दर शुरुआत के बाद एक दर्दभरा अंत हैं ..........................

Wednesday, May 7, 2008

अन्तर मन

कभी सागर की गहराइयों मैं उतर जाता हूँ,
कभी आकाश के नीले रंग मैं खो जाता हूँ,
मन मैं बहुत कुच्छ होते हुए भी ,
कुच्छ नहीं कह पाता हूँ,
यह कैसी हैं पहेली ,
मैं इसमें उलझ जाता हूँ,
अंधेरी रात मैं भी एक ,
नयी सुबह का सपना सजाता हूँ,
ऐसा कुछ तो हैं ,
जिसकी तालाश में चला जाता हूँ,
काश वोह मिल जाए ,
जिससे यह चेहरा खिल जाए ,
नहीं तो तनहा रहकर भी ,मैं मुस्कुराता हूँ .

"संवेदना "

"जो ख्वाब उन नन्ही आँखों ने सजाये थे ,
जो रेत के घर बनाये थे ,
हकीक़त से रूबरू होते ही वोह कहीं खो गए ,
क्या बनने चले थे और क्या से क्या हो गए,
टूट गया कांच सा वोह मन ,
छीन गया उन फूलों से उनका बचपन ,
वोह नन्ही कलियाँ कहीं मुरझा गयी,
ना जाने बेमौसम यह पतझड़ कहाँ से आ गयी,
इन शब्दों मैं छिपी हैं उनके जीवन की वेदना ,
इनके माध्यम से व्यक्त करता हूँ उनके प्रति मैं अपनी संवेदना

Tuesday, April 29, 2008

किसी की अभिलाषा

नदियाँ के पानी सी होगी वोह,
एक कहानी सी होगी वोह ,
फूलों को भी खिला दे जो,
हर और खुशियाँ फैला दे,
हर पल को महका दे ,
ऐसी होगी वोह,
एक कल्पना वोह,
एक तालाश वोह ,
किसी के लिए प्रेरणा,
किसी के लिए आखरी आस वोह,
ज़िन्दगी को नए आयाम देगी जो ,
एक अनसुनी कहानी सी वोह ,
ऐसी होगी वोह,
हाँ शायद ऐसी ही....

सपने

सपने एक नए जहाँ मैं ले जाते है,
सितारों से रूबरू कराते है ,
यह सपने नई मंजिलो की चाह जागते हैं ,
निराशा मैं आशा के पंख लगते है ,
यह अनोखे सपने....